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का विशेष महत्व है。 यह गाइड आपको इन पाँचों चैत्यवंदन के स्थान, उनके महत्व और हिंदी पाठ के साथ पूरी जानकारी प्रदान करेगी।
सिद्धगिरीनो ए महिमा, रायण वृक्ष विशेष;पाप तणां पुंज प्रजले, न रहे दुःखनो लेश।भाव धरीने जे वंदे, मनमां धरी आनंद;ते नर पामे शाश्वत, सुख संपत्तिनो कंद। यत्रा विधि (Quick Reference)
यह कहानी आपको न केवल पलिताना की पवित्रता से परिचित कराएगी, बल्कि आपको चैत्यवंदन के पीछे के भाव और विधि को भी समझने में मदद करेगी।
शीतल छाया रायण तणी, परम शांतिनो वास;जिहां बेसी प्रभु ध्यान धरे, प्रकटे दिव्य प्रकाश।प्रथम जिनेश्वर ऋषभदेव, पादपद्म ज्यां स्थाप्या;नवाणु वारना फेरमां, प्रभुये दर्शन आप्या। palitana 5 chaityavandan in hindi full
ॐ नमः सिद्धेभ्यः। ॐ नमो अरिहंताणं।
- तृतीय चैत्यवंदन
पुंडरीक स्वामी ने इसी पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया था। विधि: रायण वृक्ष विशेष
इन पाँचों पर यदि भावपूर्वक चैत्यवंदन किया जाए, तो यात्रा का फल अक्षय हो जाता है।
श्री शत्रुंजय महातीर्थ के दर्शन मात्र से ही जीव की दुर्गति का नाश हो जाता है। जो भी भव्य जीव सच्चे भाव से इस पर्वत पर पैर रखता है, प्रभु उसका संसार सागर पार करा देते हैं। यह अनंत सिद्धों की भूमि और समस्त तीर्थों का राजा है। यहाँ आदिनाथ (ऋषभदेव) प्रभु ने 99 बार समवशरण कर अपने चरण स्थापित किए हैं Tattva Gyan।
गजीपुरी नगरीनो धणी, कंचन वरणी छे काय। पाप तणां पुंज प्रजले
: It marks the beginning of the spiritual journey, acknowledging the countless souls who attained liberation on this hill.
अंत में पढ़कर पूर्ण श्रद्धा से शीश झुकाएं। चैत्यवंदन के लाभ
मुख्य दरबार (मुख्य मंदिर) में मूलनायक श्री आदिनाथ प्रभु का अंतिम चैत्यवंदन।
रायण वृक्ष के नीचे स्थित का वंदन अत्यंत फलदायी माना जाता है。 चैत्यवंदन मूल पाठ: